Chhapaak movies 2019

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Director- Meghna Gulzar

Artists- Deepika Padukone, Vikrant Messi

I wish the acid did not sell, if it is not available, I do not throw it either.

This dialogue of Malti is the essence of the entire film. How an acid attack changes a girl's life and the challenges she has to go through are rarely discussed deeply. Most of us regret it by making her the victim. But this film changes the views of the people. Women who have suffered from acid attacks do not feel sympathetic, but want a chance for respect and equality in society. 'Chhapak' also questions the illegal sale of acid. Meghna Gulzar has maintained the seriousness of the subject to Climax, which can make you restless ..
At the end of the film, where there is just a smile on your face, then…

Chhapak Film Review
Movie story

Malti (Deepika Padukone), who is fighting the needs of life, is an acid attack victim and is looking for a good job. She knows that she is hardworking and talented, the world believes that she can do a lot. But hesitates to give him a chance. Why? Because his face is deformed due to throwing acid. It does not meet the criteria of the beauty of society. In such a situation, he meets Amol (Vikrant Messi), who has become a social worker from a journalist and runs an NGO. Amol's NGO treats acid attack victims and tries to lead a better life. Malti joins this NGO. At the same time, she raises her voice against the attack on herself and fights her fight against Babaki. It also demands a change in the law to ban acid. Malti is known nationwide for her PIL.

Malti is a student of 12th when Bashir Khan, a boy from the neighborhood, proposes her for marriage. On hearing of Malti's refusal, he decides to take revenge and one day attacks Malti with acid. Malti's life changes in an instant. From a girl playing a laugh, to a dreaming girl .. How Malti becomes a sleeping victim and then a self-believer facing challenges and an inspiration to millions .. This journey is worth seeing.

Chhapak Film Review
acting

Deepika Padukone played the strongest side of the film as Malti. Malti's walking, speaking, shouting, laughing, fighting .. Deepika is composed in every sense. Deepika was successful in showing the pain in Malti's eyes and the hope in her heart. There is no doubt that this is one of the best performances of his career. At the same time, Vikrant Messi took the scene in which he appeared as well. Vikrant is a strong actor and that is why he shines even after playing a few minutes in a two-hour film. Amol's character shows the truth, a passion. Madhurjit Saraghi has been effective in the co-stars.



Chhapak Film Review
Direction

After the sword, Raazi, Meghna Gulzar has now shown that she has a strong hold on sensitive subject. Not only the direction, but Meghna Gulzar has also contributed to the writing. The issue of acid attack is not new, but it would not have been easy to present the subject in a commercial manner. Through the story of Laxmi Aggarwal, the director has expressed the pain, courage, faith and hope of the acid attack Survivor. Although Meghna Gulzar was seen tied somewhere in this story, some scenes were repeated, and some characters were left in half. The story of the film touches your heart, but not for long.



Chhapak Film Review
Technical aspect

Amol (Vikrant) says to Malati full of helplessness and resentment- 'Acid dissolves in the mind first, then only comes in the hand ....'. Some of the dialogues written by Atika Chauhan and Meghna Gulzar are very solid and leave a lasting impression. The editing of Nitin Bad could have made the story a bit more agile, making the film's message look more effective. Malay Prakash should be praised for superb cinematography.



Chhapak Film Review
music

The music of the film is given by Shankar- Ehsaan- Loy. The good thing is that there are only two songs in the film, so they do not cut the story anywhere. The lyrics (Chhapak and Nok Jhonk) written by Gulzar further strengthen the film.



Chhapak Film Review
See or not see

Must see. Directed by Meghna Gulzar, based on a serious crime like acid attack, the film 'Chhapak' reveals a frightening reality of society, which needs to be eradicated as soon as possible. This story will make you think along with distracting



HINDI



निर्देशक- मेघना गुलजार

कलाकार- दीपिका पादुकोण, विक्रांत मेसी

काश की एसिड बिकता ही नहीं, मिलता ही नहीं तो फेंकता भी नहीं..

मालती का यह संवाद पूरी फिल्म का सार है। तेज़ाब के हमले से किस तरह एक लड़की की ज़िंदगी बदल जाती है और उसे किन चुनौतियों से गुज़रना पड़ता है, इन बातों पर शायद ही कभी गहरी बातचीत की गई हो। ज्यादातर हम उसे पीड़िता बनाकर अफसोस जता लेते हैं। लेकिन यह फिल्म लोगों के इसी नजरीए को बदलती है। एसिड अटैक का शिकार हुईं महिलाओं को सहानुभूत नहीं, समाज में इज्ज़त और बराबरी का मौका चाहिए। 'छपाक' तेज़ाब की गैर कानूनी बिक्री पर भी सवाल खड़े करती है। मेघना गुलजार ने विषय की गंभीरता को क्लाईमैक्स तक बरकरार रखा है, जो आपको बेचैन कर सकती है..
फिल्म के अंत में जहां आपके चेहरे पर एक मुस्कान बस आ रही होती है, तभी....

छपाक फिल्म रिव्यू
फिल्म की कहानी

जिंदगी की जरूरतों से लड़ती मालती (दीपिका पादुकोण) असिड अटैक पीड़िता है और एक अच्छी नौकरी की तलाश में है। वह जानती है कि वह मेहनती और प्रतिभावान है, दुनिया मानती है कि वह बहुत कुछ कर सकती है। लेकिन उसे मौका देने से कतराती है। क्यों? क्योंकि उसका चेहरा एसिड फेंके जाने की वजह से विकृत है। वह समाज के खूबसूरती के मापदंड पर खरी नहीं उतरती। ऐसे में उसकी मुलाकात होती है अमोल (विक्रांत मेसी) से, जो पत्रकार से समाज सेवक बन चुका है और एक एनजीओ चलाता है। अमोल की एनजीओ एसिड अटैक पीड़िताओं का इलाज कराती है और बेहतर जिंदगी देने की कोशिश करती है। मालती इस एनजीओ से जुड़ जाती है। साथ ही साथ खुद पर हुए हमले के खिलाफ आवाज उठाती है और बेबाकी से अपनी लड़ाई लड़ती है। वह तेज़ाब बैन कराने के लिए कानून में बदलाव की भी मांग करती है। अपने PIL को लेकर मालती देशभर में चर्चित है।

मालती 12वीं की छात्रा रहती है, जब पड़ोस का एक लड़का बशीर खान उसे शादी के लिए प्रपोज करता है। मालती का इंकार सुनते ही वह बदला लेने की ठानता है और एक दिन रास्ते में मालती पर तेज़ाब से हमला कर देता है। एक पल में मालती की ज़िंदगी बदल जाती है। एक हंसती खेलती, सपने देखती लड़की से.. मालती किस तरह एक बिलखती पीड़िता और फिर चुनौतियों का सामना करते करते आत्म विश्वासी और लाखों के लिए प्रेरणा बन जाती है.. यह सफर देखने लायक है।

छपाक फिल्म रिव्यू
अभिनय

मालती के किरदार में दीपिका पादुकोण फिल्म की सबसे मजबूत पक्ष रहीं। मालती के चलने, बोलने, चिल्लाने, हंसने, लड़ने.. हर हाव भाव में दीपिका रच बस गई हैं। मालती की आंखों में दर्द और दिल में उम्मीद दिखाने में दीपिका सफल रहीं। कोई शक नहीं कि यह उनके करियर की सबसे बेहतरीन परर्फोमेंस में से एक है। वहीं, विक्रांत मेसी जिस दृश्य में भी दिखे, उस सीन को अपना बनाकर ले गए। विक्रांत दमदार अभिनेता हैं और यही वजह है कि दो घंटों की फिल्म में कुछ मिनट का किरदार निभाकर भी वह चमक उठे। अमोल के किरदार में सच्चाई दिखती है, एक जुनून दिखता है। सह कलाकारों में मधुरजीत सरघी प्रभावी रही हैं।



छपाक फिल्म रिव्यू
निर्देशन

तलवार, राज़ी के बाद अब छपाक से मेघना गुलज़ार ने दिखा दिया कि वो संवेदनशील विषय पर मजबूत पकड़ रखती हैं। सिर्फ निर्देशन ही नहीं, बल्कि मेघना गुलजार ने लेखन में भी योगदान दिया है। एसिड अटैक का मुद्दा नया नहीं है, लेकिन इस विषय को एक कमर्शियल ढंग से पेश करना आसान नहीं रहा होगा। लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी के द्वारा निर्देशक ने एसिड अटैक सर्वाइवर के दर्द, हिम्मत, विश्वास और उम्मीद को बयां किया है। हालांकि इस कहानी में मेघना गुलजार कहीं कहीं बंधती नजर आईं, कुछ दृश्य दोहराए से लगे तो कुछ किरदार आधे में छोड़ दिये गए। फिल्म की कहानी आपके दिल को तो छूती है, लेकिन लंबे समय तक के लिए नहीं।



छपाक फिल्म रिव्यू
तकनीकि पक्ष

अमोल (विक्रांत) बेबसी और आक्रोश से भरा मालती से कहता है- 'एसिड पहले दिमाग में घुलता है, तभी तो हाथ में आता है....'। अतिका चौहान और मेघना गुलजार द्वारा लिखे गए कुछ संवाद बेहद ठोस हैं और लंबे समय के लिए प्रभाव छोड़ जाते हैं। नितिन बैड का संपादन कहानी को थोड़ा और चुस्त कर सकता था, जिससे फिल्म का संदेश ज्यादा प्रभावी नजर आता। शानदार सिनेमेटोग्राफी के लिए मलय प्रकाश की तारीफ होनी चाहिए।



छपाक फिल्म रिव्यू
संगीत

फिल्म का संगीत दिया है शंकर- एहसान- लॉय ने। अच्छी बात है कि फिल्म में सिर्फ दो ही गाने हैं, लिहाजा वो कहीं भी कहानी को काटते नहीं हैं। गुलजार द्वारा लिखे गए गीत (छपाक और नोक झोंक) फिल्म को और मजबूत बनाते हैं।



छपाक फिल्म रिव्यू
देंखे या ना देंखे

जरूर देंखे। एसिड हमले जैसे गंभीर अपराध पर आधारित मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी फिल्म 'छपाक' समाज की एक खौफनाक सच्चाई सामने रखती है, जिससे जल्द से जल्द खत्म करने की जरूरत है। यह कहानी आपको विचलित करने के साथ साथ सोचने पर मजबूर करेगी

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